Tuesday, 15 November 2016
नोटबंदी से भ्रष्ट और माफियाओं में हड़कंप
पुराने नोटों को बदलने में शुरू हुई कालाबाजारी, लोगा हो रहे परेशान
मेघनगर। ( झाबुआ/मध्यप्रदेश/भारत) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घोषणा के बाद देश सहित पूरें अंचल में अवैध और बिना हिसाब-किताब के व्यापार करने वालों में हड़कंप मच गया है । एक ओर आम लोगों में इसे लेकर उत्साह देखा जा रहा, तो दुसरी ओर बिना बिल , बिना नियम -कायदों के व्यापार करने वालों के हाथ पाव अभी से फुलना शुरू हो गये हैं ।
सरकार ने भले ही नोट बदलने के लिए ३१ दिसम्बर २०१६ तक का समय दिया है किंतु काली कमाई का जखीरा भर कर रखने वालों ने अभी से अपने पास रखे नोटो का सौदा करना शुरू कर दिया है । सूत्रों की माने तो बाकायदा इसके लिए २५ से ३० लोगों की टीम तैयार की गई है जो ना सिर्फ नगर सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों की बैंक और डाकघरों की ब्रांचो में ४ हजार के नोटों की अदला-बदली करवाने के काम में जुटे हैं । कुछ लोग इस काम के लिए ५०० की एक नोट बतौर मेहनताना भी दे रहे हैं । जिले में सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाने के नाम पर की गई अवैध वसूली करने वाले भ्रष्ट अफसर और बाबूओं को अपने द्वारा जमा की गई अकुत सम्पत्ति के सर्वाजनिक होने का डर सता रहा हैं वहीं व्यापार की आड में सुदखोरी करने वालों और गरीबों का शोषण करने वाले समाजसेवीयों के पैरों तले धरती अभी से डगमगाने लगी हैं । बाजार की चर्चा उर्फ अफवाह की माने तो नगर में इन दिनों ५० करोड़ से अधिक की कैश ( पुराने ५००-१०००) के नोट खपाने की प्लानिंग तैयार की जा रही है । ये पैसा कहां से आया और किसका है इस बारे में अभी कोई सूचना नहीं है किंतु यह तय है की यह पैसो सफेद यानी मेहनत का नहीं हैं । जो लोग मोदी की घोषणा के बाद गरीबी रेखा से अमीरी की श्रेणी में आ रहे हैं, उन्हे आयकर विभाग के सवाल -जवाब की चिंता सताने लगी हैं । माफिया और भ्रष्टों द्वारा बड़े पैमाने पर कैश धनराशी को सोने की धातु में खपाया जा रहा है । नगर में सराफा का काम करने वाले लोगों के यहां चंादी और सोने के अलग-अलग भाव है , साथ ही कुछ बिल होने पर पुराना सोना खरीद रहे है तो कुछ बिना बिल का माल भी खपा रहे हैं । सोमवार को बैंकों के अवकाश के कारण बाजार में विरानीया छाई रही । नोटबंदी के चलते सर्वाधिक शोषण ग्रामीणों का हो रहा है यहां कुछ व्यापारी ५०० की पुरानी नोट के बदले ४०० और ४५० का सामान ही दे रहे है, कुछ लोग खुल्ले पैसे के नाम पर १० से २० प्रतिशत की अवैध वसूली में जुट गये हैं । नोटबंदी का असर सोयाबिन की फसल की खरीदी पर भी पड रहा है । गुटका पाऊच के भाव थोक व्यापारियों ने अपनी मर्जी से ब$ढा दिये जिस कारण बाजार की पान दुकानों से गुटका पाऊच की ब्रिकी ३० प्रतिशत अधिक दाम पर की जा रही है । नोटबंदी का असर सभी वर्ग-समुदाय पर समान रूप से पड़ रहा है किंतु ऐसे कुछ चयनित लोग भी यहां मौजूद है जो किराये के लोगों की सहायता से अपनी काली कमाई को सफेद करने के हर संभव प्रयास में जुटे हुये हैं । प्रशासन और सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए की नोट बदलने वाला यह काम स्वयं के लिए करे ना की दुसरे के लिए , ताकि इससे बैंक और डाकघर के आगे अनावश्यक भीड़ भी कम होगी और लोगों को परेशानी भी नहीं होगी ।
खुल्ले पैसों की परेशानी : नोटबंदी के बाद अल सुबह से देर रात तक तय सीमा में बैंक शाखाओं द्वारा नोट बदलने के साथ ही नकद राशी जारी की जा रही है । बाजार में २००० के नोट आने के बाद सर्वाधिक परेशानी इन्हें खुल्ले करवाने की हैं , चूंकि सरकार ने ५०० और १००० के नोट पहले ही बंद कर दिये ऐसे में जिन लोगों के हाथों में नये नोट आ रहे वे भी चाह कर इन रूपयों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे । नगर में लगी एटीएम मशीनों में भी पैसा नहीं निकल रहा जिससे ना सिर्फ बैंकिग के माध्यम से व्यापार व्यावसाय करने वाले अपितु हर उस व्यक्ति को परेशानी हो रही है जिसके खाते में तो पैसा परन्तु उसके हाथ में पैसा नहीं आ पा रहा ।
अफवाहों का बाजार गर्म : नगर सहित पूरें अंचल में कुछ व्यापारी डरे सहमें हुए हैं । सोशल मीडिया में आ रही खबरों के बाद पुरे अंचल में अफवाहों का बाजार गर्म हैं । बीपीएल राशन कार्डधारियों द्वारा अपने जनधन खातों में अधिक राशी जमा होने पर गरीबी रेखा का राशनकार्ड निरस्त होने की बात हो रही है तो कोई नगर में हो रहे लेन-देन की जानकारी आयकर विभाग के पास होने की बात कह रहा है। सोमवार को दाहोद शहर में कुछ डाक्टरों सहित व्यापारियों के यहां आयकर विभाग की कार्यवाही की खबर चर्चा का विषय रही । नगर में एक अफवाह यह भी है यहां भी बड़े लेन-देन पर सेल्सटैक्स से लेकर सीआईडी के खुफिया कर्मचारी नजर रखे हुए है ।
ज्ञातव्य है कि सरकार ने भले ही नोट बदलने के लिए ३१ दिसम्बर २०१६ तक का समय दिया है किंतु काली कमाई का जखीरा भर कर रखने वालों ने अभी से अपने पास रखे नोटो का सौदा करना शुरू कर दिया है । सूत्रों की माने तो बाकायदा इसके लिए २५ से ३० लोगों की टीम तैयार की गई है जो ना सिर्फ नगर सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों की बैंक और डाकघरों की ब्रांचो में ४ हजार के नोटों की अदला-बदली करवाने के काम में जुटे हैं । कुछ लोग इस काम के लिए ५०० की एक नोट बतौर मेहनताना भी दे रहे हैं । जिले में सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाने के नाम पर की गई अवैध वसूली करने वाले भ्रष्ट अफसर और बाबूओं को अपने द्वारा जमा की गई अकुत सम्पत्ति के सर्वाजनिक होने का डर सता रहा हैं वहीं व्यापार की आड में सुदखोरी करने वालों और गरीबों का शोषण करने वाले समाजसेवीयों के पैरों तले धरती अभी से डगमगाने लगी हैं । बाजार की चर्चा उर्फ अफवाह की माने तो नगर में इन दिनों ५० करोड़ से अधिक की कैश ( पुराने ५००-१०००) के नोट खपाने की प्लानिंग तैयार की जा रही है । ये पैसा कहां से आया और किसका है इस बारे में अभी कोई सूचना नहीं है किंतु यह तय है की यह पैसो सफेद यानी मेहनत का नहीं हैं । जो लोग मोदी की घोषणा के बाद गरीबी रेखा से अमीरी की श्रेणी में आ रहे हैं, उन्हे आयकर विभाग के सवाल -जवाब की चिंता सताने लगी हैं । माफिया और भ्रष्टों द्वारा बड़े पैमाने पर कैश धनराशी को सोने की धातु में खपाया जा रहा है ।
नगर में सराफा का काम करने वाले लोगों के यहां चंादी और सोने के अलग-अलग भाव है , साथ ही कुछ बिल होने पर पुराना सोना खरीद रहे है तो कुछ बिना बिल का माल भी खपा रहे हैं । सोमवार को बैंकों के अवकाश के कारण बाजार में विरानीया छाई रही । नोटबंदी के चलते सर्वाधिक शोषण ग्रामीणों का हो रहा है यहां कुछ व्यापारी ५०० की पुरानी नोट के बदले ४०० और ४५० का सामान ही दे रहे है, कुछ लोग खुल्ले पैसे के नाम पर १० से २० प्रतिशत की अवैध वसूली में जुट गये हैं । नोटबंदी का असर सोयाबिन की फसल की खरीदी पर भी पड रहा है । गुटका पाऊच के भाव थोक व्यापारियों ने अपनी मर्जी से ब$ढा दिये जिस कारण बाजार की पान दुकानों से गुटका पाऊच की ब्रिकी ३० प्रतिशत अधिक दाम पर की जा रही है । नोटबंदी का असर सभी वर्ग-समुदाय पर समान रूप से पड़ रहा है किंतु ऐसे कुछ चयनित लोग भी यहां मौजूद है जो किराये के लोगों की सहायता से अपनी काली कमाई को सफेद करने के हर संभव प्रयास में जुटे हुये हैं । प्रशासन और सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए की नोट बदलने वाला यह काम स्वयं के लिए करे ना की दुसरे के लिए , ताकि इससे बैंक और डाकघर के आगे अनावश्यक भीड़ भी कम होगी और लोगों को परेशानी भी नहीं होगी ।
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